Tuesday, December 2, 2008

आतंक का साया...

यह कैसा समय है आया
हर तरफ़ आतंक का साया
आखिर कब तक रहेगा आतंक
इंसानियत पर होगा कलंक
कभी तो मिलेगी निजात
उजली होगी ये काली रात
कोई तो होगा ऐसा सिपाही
जो रोकेगा यह तबाही
वक्त के लिलार पर लिखेगा
पत्थरों पर भी गढेगा
अब सुरक्षित है मेरा देश
अब नही कोई क्लेश
अब हम पूरी तरह आजाद हैं
अब सभी गुलशन आबाद हैं।
- नीरज शुक्ला "नीर"